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बिहार में 11वीं-12वीं के लिए नया NCERT आधारित पाठ्यक्रम लागू, 20 मई तक मिलेंगी किताबें, मूल्यांकन में बड़ा बदलाव

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बिहार में 11वीं-12वीं के लिए NCERT आधारित नया पाठ्यक्रम लागू किया गया है। 20 मई तक किताबें उपलब्ध होंगी और मूल्यांकन प्रणाली में भी अहम बदलाव किए गए हैं।

पटना/आलम की खबर:बिहार में नई शिक्षा नीति के तहत इंटरमीडिएट शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लागू किया गया है। पहली बार 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह से एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है, जिससे राज्य की शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप बनाने की कोशिश की जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत विषयवार नई किताबों की छपाई शुरू कर दी गई है और लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि 20 मई तक सभी छात्रों को नई पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएं।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस बदलाव से न केवल पाठ्यक्रम की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को भी सीधा लाभ मिलेगा। अब तक राज्य बोर्ड और राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम में अंतर होने के कारण छात्रों को अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ती थी, लेकिन अब यह अंतर काफी हद तक कम हो जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत भाषा विषयों का दायरा भी काफी विस्तृत किया गया है। छात्रों को अपनी रुचि और पृष्ठभूमि के अनुसार विभिन्न भाषाओं में से चयन करने का अवसर मिलेगा। इसमें हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत जैसी प्रमुख भाषाओं के साथ-साथ क्षेत्रीय और पारंपरिक भाषाओं को भी शामिल किया गया है। इस पहल का उद्देश्य भाषाई विविधता को बढ़ावा देना और छात्रों को अपनी मातृभाषा में अध्ययन का अवसर देना है।

इसी प्रकार वैकल्पिक विषयों की सूची को भी व्यापक बनाया गया है। विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय के अलावा तकनीकी और व्यावसायिक विषयों को भी शामिल किया गया है, जिससे छात्रों को अपने करियर के अनुसार विषय चुनने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। यह बदलाव छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई के दायरे से बाहर निकालकर उन्हें नए अवसरों की ओर ले जाने में सहायक हो सकता है।

नई प्रणाली में छात्रों को तीन विषय अनिवार्य रूप से लेने होंगे, जबकि वे चाहें तो एक अतिरिक्त विषय भी चुन सकते हैं। इससे छात्रों को अपने रुचि के क्षेत्रों में गहराई से अध्ययन करने का मौका मिलेगा। साथ ही, यह व्यवस्था लचीलेपन को भी बढ़ावा देती है, जो नई शिक्षा नीति का एक प्रमुख उद्देश्य है।

पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी सहारा लिया जा रहा है। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे विषयवार टॉपिक के अनुसार लेक्चर रिकॉर्ड करें, ताकि छात्र स्कूल के अलावा घर पर भी पढ़ाई कर सकें। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, जो किसी कारणवश नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते हैं।

इसके साथ ही समूह चर्चा की व्यवस्था को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों में संवाद कौशल, तार्किक सोच और आत्मविश्वास को विकसित करना है। समूह चर्चा के माध्यम से छात्र न केवल विषय को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे, बल्कि अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना भी सीखेंगे।

मूल्यांकन प्रणाली में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब केवल लिखित परीक्षा के आधार पर ही छात्रों का मूल्यांकन नहीं होगा, बल्कि उनकी नियमित भागीदारी, प्रस्तुति और समझ को भी महत्व दिया जाएगा। एक यूनिट के लिए 20 प्रतिशत वेटेज तय किया गया है, जबकि कंटीन्युअस असेसमेंट को 60 अंकों का रखा गया है। इसमें लिखित और मौखिक दोनों प्रकार के मूल्यांकन शामिल होंगे।

फाइनल टर्म असेसमेंट भी 100 अंकों का होगा, जिसमें छात्रों के समग्र प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाएगा। इस नई प्रणाली के तहत इंटरनल मार्क्स देने की प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों के सर्वांगीण विकास में मदद करेगा। इससे न केवल उनकी अकादमिक क्षमता बढ़ेगी, बल्कि वे व्यावहारिक जीवन के लिए भी बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। हालांकि, इस नई व्यवस्था को लागू करने में कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जैसे शिक्षकों का प्रशिक्षण, संसाधनों की उपलब्धता और छात्रों को नई प्रणाली के अनुरूप ढालना।

सरकार और शिक्षा विभाग का कहना है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और स्कूलों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है।

फिलहाल, यह बदलाव बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में राज्य के छात्रों का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर हो सकता है।

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